चेन खिंचने पर ट्रेन कैसे रुकती है। ट्रेन में ब्रेक कैसे काम करता है।

चेन खिंचने पर ट्रेन कैसे रुकती है। ट्रेन में ब्रेक कैसे काम करता है।

ट्रेन में सफर करने के दौरान आपने सुना होगा कि इमरजेंसी में ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोका जा सकता है । चेन खींचने पर ट्रेन कैसे रुक जाती है , आइए जानें।


ट्रेन में ब्रेक कैसे काम करता है। 

सबसे पहले हम यह जानते हैं कि ट्रेन में ब्रेक काम कैसे करते हैं। ट्रेन में भी वही ' एयर ब्रेक ' होता है, जो सड़क पर चलने वाले किसी कमर्शियल वाहन जैसे कि बस या ट्रक में होता है। ट्रेन के ब्रेक में एक पाइप होता है, जिसमें हवा भरी होती है। यही हवा ब्रेक - शू को आगे - पीछे करती है और जब ब्रेक - शू पहिए पर रगड़ खाता है तो ब्रेक लगने लगता है।


ब्रेक कब और किस स्थिति में लगाना है , ये पूरी तरह ट्रेन के ड्राइवर यानी लोको पायलट और उसके सहयोगी गार्ड की सूझबूझ पर निर्भर करता है । किसी भी सड़क पर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए तीन सिग्नल होते हैं , ठीक वैसे ही रेलवे में भी तीन सिग्नल होते हैं - हरा , पीला और लाल।


हरा सिग्नल होने पर ट्रेन अपनी स्पीड से चलती रहती है , लेकिन जब पीला सिग्नल मिलता है तो लोको पायलट को ट्रेन की स्पीड कम करनी होती है। अगर लोको पायलट को लगातार पीला सिग्नल मिल रहा है तो उसे बार - बार अपनी स्पीड कम करने की जरूरत होती है । वहीं , अगरलाल सिग्नल मिलता है तो लोको पायलट की ये जिम्मेदारी है कि वो सिग्नल से पहले ट्रेन रोक दे।


पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म सिस्टम , ब्रेक पाइप और अलार्म चेन के बीच लगाया जाता है। जब अलार्म चेन खींची जाती है , तो अलार्म वॉल्व में दिए गए चोक के माध्यम से ब्रेक पाइप से हवा का प्रेशर बाहर निकलता है और ट्रेन में ब्रेक लगते हैं।


ब्रेक लगने के कारण ब्रेक सिस्टम में हवा का प्रेशर अचानक कम हो जाता है, जिसके कारण ड्राइवर को संकेतक सिग्नल और हूटिंग सिग्नल मिलता है। इसके द्वारा ड्राइवर को ब्रेक पाइप प्रेशर में गिरावट के बारे में पता चलता है और वह ट्रेन को रोककर इसके कारणों की जांच करता है।

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