Hindi kahani. चार कंजुस की कहानी। Char kanjus ki kahani. अमीर होने का दिखावा।

 

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Hindi kahani. चार कंजुस की कहानी। Char kanjus ki kahani. अमीर होने का दिखावा।

 सोनपुर गांव के 4 व्यक्ति पैसे कमाने परदेश गए। चारों स्वभाव में कंजूस थे। गांव में चारों का घर साथ मे ही था। परदेश में पैसे कमाते गए और बचत भी करते गए। कुछ पैसे कमाने के बाद वो चारो अपने गांव सोनापुर वापस आये। चारो गाँव के चौराहे पे मिले। चारों एकदुसरे से बातचीत करने लगे। उसमे से एक नए कहा अरे भाई हम सब कमाई कर के आये तो सोना खरीदा की नहीं? गाँव वाले को बताना है कि हमारे पास भी सोना है। उसमे से एक ने कहा मेने सोने का फ्रेम का चश्मा बनाया है। दूसरे ने कहा मेने सोने का अंगूठी खरीदा, तीसरे ने कहा मेने भी सोने का थाली लिया। चौथा व्यक्ति ज्यादा कंजूस था उसने कहा मेने सोने का दांत बनाया। मेने ज्यादा सोना नहीं खरीदा। ज्यादा बेकार में ख़र्च क्यों करे। 

चारों दोस्तो ने एक दूसरे से सवाल किया। अरे भाई हमने सोना खरीद लिया है तो चलो गांव वालों को बताया जाए कि हमारे पास भी सोना है। हम सबको लोग कंजूस कंजूस कहते थे। उन्हें भी बता दे कि हम भी सोना खरीद सकते है।  चारों ने इस बात पर हा कहा। पर एक सवाल हुआ कि गांव वालों को ये सब बताएंगे कब। सबको एक साथ बात देते है। तो सब ने एक काम किया। गाँव के लोगो को अपने पास बुलाते है। एक व्यक्ति ने कहा सबको बुलाएंगे  तो सबको खाना खिलाना पड़ेगा। तो इसमें ख़र्चा कितना बढ़ जाएगा। 

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चारों ने कहा यह आइडिया सही है। दूसरे दिन चारों पूरे गांव में सबको बताने लगे कि हमने परदेश कमाई करके आये है और आज साम को हमारे यहां खाने का आमंत्रण है। यह सुनकर गांम वाले खुस हो गए और कहने लगे चलो परदेश जाने के बाद यह कंजूस सुधर तो गए। साम के समय गाँव वाले चारों व्यक्ति के पास इकट्ठे हुए। चश्मे वाला  व्यक्ति दरबाजे पर खड़ा होकर सबको कहता आओ आओ भाई। और दूसरा व्यक्ति अपनी उंगली से सबको बताता की वहाँ जेक बैठो। इस से अंगूठी सबको दिखे। और तीसरा सोने का थारी लेकर बैठा था ओर सबको कहता सोने की थारी में खाने से कोई बीमारी नहीं होता। और चौथा सबको अपना दांत बताता और कहता सोने के दाँत से चबा के खाने से बीमारी नहीं होता। 


सबको चारों व्यक्ति के पत्नी ने पानी पिलाया। सब लोग बैठे तो चारो ने कहा हम लोग परदेस कमा के आये तो सोना भी खरीद लिया। यह देखने के लिए आप सब यहां आए इस लिए आपका धन्यवाद। कोई दिन समय निकाल के हमारे घर भोजन के लिए जरूर आना। 


गांव वाले लोगोने कहा अरे भाई आज सब इकट्ठे हुए है तो आज ही खिला दो। चारों ने कहा अब तो खाना बनाने में वक्त लगेगा और आपसब भेखे बैठे रहो ये अच्छा नहीं लगेगा। फिर कभी आना। गांव वाले गुस्सा हुए। ये चारों परदेस से कमा के जरूर आये पर रहे कंजुस के कंजुस। बेकार में सब लोगो का वक़्त बर्बाद किया। अब इसका भरोसा कभी मत करना। चलो अपने अपने घर। 

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